जनवरी 1990 में  कश्मीर की हालत सीरिया से ज्यादा खतरनाक थे वैसे अत्याचार तो बग़दादी ने भी नहीं किये -सुनन्दा वशिष्ठ

 
मेरे पापा मुझे और मेरी मम्मी की हत्या करना चाहते थे वे पुराने चाकू लेकर हम दोनों को मार देना चाहते थे क्योंकि हम अगर जिंदा रहते तो इस्लामिक लोग क्रूर से क्रूरतम तरीके से हत्या करते।जी हां ये बयान है कश्मीरी युवती सुनंदा वशिष्ठ का सयुंक्त राष्ट्र संगठन में।
वो आगे बताई जो न आपने सुना न देखा। 
वो बोली जनवरी 1990 में  कश्मीर की हालत सीरिया से ज्यादा खतरनाक थे वैसे अत्याचार तो बग़दादी और isis ने भी नहीं किए ।
एक लैब टेक्निशन महिला को अपहरण किया गया, रेप किया गया फिर लकड़ी चिरने वाले आरा मशीन से उसका 2 भाग कर दिया गया ऐसा पुरुषों के साथ भी किया गया।ऐसा बच्चो के साथ भी किया गया।वहा ऐलान किया गया कि भाग जाओ या इस्लाम स्वीकार करो या मरो हा भागने से पहले अपनी महिलाओं को छोड़ दो।
इस्लामिक आतंकियों के डर से एक हिन्दू चावल के कंटेनर में छिपा था आतंकी वहा से जा रहे थे तो उस हिन्दू के मुस्लिम पड़ोसियों ने उसके छिपने की जानकारी दे दी फिर क्या था?उसका दो भाग कर दिया गया 1100 हिन्दुओं को काटा गया,सैकड़ों महिलाओं को और बच्चो को गाजर मुली की तरह काटा गया।20000 घरों में आग लगा दी गई।
हिन्दुओं की 20000 दुकानें लूट ली गई और उसमे आग लगा दी गई।हजारों हिन्दुओं के खेतों पर कब्जा किया गया।हजारों मंदिर जला दी गई।
400000 हिन्दुओं को कश्मीर से भागना पड़ा।उस समय कांग्रेस और नेशनल कांग्रेस कि सरकार थी।
फारुख अब्दुला मुख्यमंत्री थे।
पर हाय रे विडम्बना ना ही इस घटना की व्यापक चर्चा विश्व में हुई और ना ही भारत में।सजा तो दूर आज तक एक भी Fir भी दर्ज नहीं हुई।
👉👉कश्मीरी लेखक व सनातन धर्म की शेरनी बहन सुनन्दा वशिष्ठ अमेरिका में मानवाधिकार का ढोंग करने वालों की बखियाँ उधेड़ते हुए  बोली मानवाधिकार का सम्मान  करो 🙏🙏🙏🙏मात्रभूमि