सत्ता के नाम गैरसैंण की चिट्ठी – यहाँ हीटर वाले नहीं जिगर वाले चाहिये

सुप्रभात। वीर स्वतन्त्रता सेनानी  चंद्र सिंह गढ़वाली की देवभूमि गैरसैंण से हम अनशन पर डटे हैं स्थाई राजधानी गैरसैंण बनाने के लिए दृढ  सँकल्प के साथ।

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पानी और जवानी जाय भाड़ में, सरकारें गैरसैंण खेलती हैं

हाल पूरे देश का एक सा ही है,   परंतु अपने उत्तराखंड का कुछ ज्यादा चिंतनीय और गंभीर है,  इंटर पास करते ही जिंदगी यहां समझो

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